श्लोक

गायत्री मंत्र / मंत्र

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेन्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात् ।।

भावार्थ:
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

 

विश्वेश्वराय वरदाय / श्लोक

विश्वेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय ,
लंबोदराय सकलाय जगध्दिताय।
नागाननाय श्रुतियग्यविभुसिताय,
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

 

या देवी सर्वभूतेषु / श्लोक

या देवी सर्वभुतेषू विष्णु मायेती शब्दिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधियते

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु निद्रारुपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

या देवी सर्वभुतेषु क्षुधारुपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

 

या कुन्देंदु तुषारहार / श्लोक

या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रव्रिता |

या वीणा वरा दंडमंडित करा या श्वेत पद्मासना ||

या ब्रह्मच्युत शंकरा प्रभुतिभी देवी सदा वन्दिता |

सामा पातु सरस्वती भगवती निशेश्य जाड्या पहा ||

 

शांताकारम भुजंगशयनम / श्लोक

शांताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशम् । विश्‍वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम् ।

लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ज्ञानगम्यम् । वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम् ॥

 

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम् |

नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम् ||

कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम् |

पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ||

भज दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम् |

रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम् ||

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम् |

आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर – दूषणम् ||

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम् |

मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम् ||

 

महामृत्युंजय मंत्र / मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं य्यजा महे सुगन्धिम्पुष्टि वर्द्धनम्

उर्व्वा रुक मिवबन्धनान् मृत्योर्म्मुक्षीय मामृतात्ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

 

असतो मा सदगमय / श्लोक

असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥

(हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो । अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ।। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥।

 

 

श्री महालक्ष्मी अष्टकम

नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुर पूजिते !

शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

नमस्तेतु गरुदारुढै कोलासुर भयंकरी !

सर्वपाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

सर्वज्ञे सर्व वरदे सर्व दुष्ट भयंकरी !

सर्वदुख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी भक्ति मुक्ति प्रदायनी !

मंत्र मुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

आध्यंतरहीते देवी आद्य शक्ति महेश्वरी !

योगजे योग सम्भुते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

स्थूल सुक्ष्मे महारोद्रे महाशक्ति महोदरे !

महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

पद्मासन स्थिते देवी परब्रह्म स्वरूपिणी !

परमेशी जगत माता महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

श्वेताम्भर धरे देवी नानालन्कार भुषिते !

जगत स्थिते जगंमाते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्रं य: पठेत भक्तिमान्नर:!

सर्वसिद्धि मवाप्नोती राज्यम् प्राप्नोति सर्वदा !!

एक कालम पठेनित्यम महापापविनाशनम !

द्विकालम य: पठेनित्यम धनधान्यम समन्वित: !!

त्रिकालम य: पठेनित्यम महाशत्रुविनाषम !

महालक्ष्मी भवेनित्यम प्रसंनाम वरदाम शुभाम !!

 

कर्पूर गौरम करूणावतारम / श्लोक

करपूर गौरम करूणावतारम

संसार सारम भुजगेन्द्र हारम |

सदा वसंतम हृदयारविंदे

भवम भवानी सहितं नमामि ||

मंगलम भगवान् विष्णु

मंगलम गरुड़ध्वजः |

मंगलम पुन्डरी काक्षो

मंगलायतनो हरि ||

सर्व मंगल मांग्लयै

शिवे सर्वार्थ साधिके |

शरण्ये त्रयम्बके गौरी

नारायणी नमोस्तुते ||

त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वं मम देव देव

कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा

बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात

करोमि यध्य्त सकलं परस्मै

नारायणायेति समर्पयामि ||

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारे

हे नाथ नारायण वासुदेव |

जिब्हे पिबस्व अमृतं एत देव

गोविन्द दामोदर माधवेती ||

 

 

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