कहने को तो उनकी वो मेहरबानियाँ हैं

कहने को तो उनकी वो मेहरबानियाँ हैं
पर किसी के लिए महज़ वो परेशानियाँ हैं

झुकी नज़रों से जो सह जाएँ हर सितम,
उनके ही वास्ते आज हर वो आसानियाँ हैं

लड़ता है जो आज अपने हक़ की लड़ाई,
लोगों की नज़र में उसकी वो नादानियाँ हैं

स्वर्ण अक्षरों में लिखा है जो नाम जहां में,
किसी के लहू से लिखी वो कुर्बांनियाँ हैं

किसी की जान, किसी की अस्मत को ख़तरा है,
हर तरफ सहमी-सहमी नौजवानियाँ हैं

आतंक से सहमी ज़िन्दगियाँ देख के नहीं,
टूटते शेयरों का देखकर वो हैरानियाँ हैं

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